गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
Wednesday, June 26, 2013
Thursday, June 6, 2013
Friday, May 31, 2013
ग़ज़ल
कोई गीत नये सुरों में जब गाया जायेगा
साँसों के साज़ को कैसे भुलाया जायेगा
धूप है कहीं छांव कहीं अँधेरा भी होगा
हमारे साथ कहाँ तक ये साया जायेगा
तवक्को फकत एक उदासी का सामान है
ये बोझ दिल से कब तक उठाया जायेगा
यूँ हम पर कोई भी इल्जाम तो नही है
मगर क्या आइने से पीछा छुड़ाया जायेगा
न ताल्लुक कम हुआ है न राब्ता ,मगर
न वो आ सकेगा न हमसे बुलाया जायेगा !
वंदना
Monday, April 22, 2013
Wednesday, March 27, 2013
हम खुद से बाहर कहाँ तक जायेंगे
थक जायेंगे तो यहीं लौटकर आयेंगे
हम खुद से बाहर कहाँ तक जायेंगे
झंझोड़ कर जगा दे इस खाब से कोई
वरना उम्मीदों के पर निकल आयेंगे
कोई तस्लीम* बाकी हो दरमियाँ अपने
इतना अगर घुटेंगे तो मर ही जायेंगे !
हर चेहरे पे लिखी है एक ही कहानी
कितनी आँखों में खुद को पढ़ते जायेंगे
कबूलते हैं आज अपने हिस्से का सच
अपने आप से कब तक मुकरते जायेंगे
जिंदगी तुझको ये पहले से बताना था
मौत से पहले भी ऐसे सबात*आयेंगे !
वंदना
Tasleem - greeting , Sabaat - thahraav
Sunday, February 3, 2013
Thursday, January 17, 2013
फांसले
फांसले
जिन्दगी कि जड़ो में
गहराती हुई
एक परिभाषा
फांसला जमीं आसमां के बीच का
फांसला डूबते सूरज और उगते चाँद के बीच
उनकी सीमाए तय करता
लेकिन इन फासलों में
ही सांस लेता है
सबका अपना अपना वजूद
वो हैं क्योकिं फासले हैं
अच्छे लगने लगे हैं
मुझे ये फासले
फासलें राही और मंजिल के
सपने और हकीकत के
फासले शफक और उफक के
फांसले उम्मीद और भरम के
फांसले ..
एक नदी के दो किनारों के
फासले हैं ...तो किनारे हैं
किनारें हैं ..तो बहाव है
बहाव है .. तो नदी है
नदी है ...तो तृप्ति है
और जीवन की इसी
तृप्ति को मैंने
जिया हैं इन फासलों में
जिनमे सांस लेता
एक पहला पहला प्यार
मेरी अहसासों की जीवितता को
हमेशा धड़कने बख्सता रहेगा ...
और हम अपनी अपनी
जगह लिए हुए
यूँ ही रहेगें
......
"मैं " .......... .... .....".तुम "
ये फांसलें !
- वंदना
उनकी सीमाए तय करता
लेकिन इन फासलों में
ही सांस लेता है
सबका अपना अपना वजूद
वो हैं क्योकिं फासले हैं
अच्छे लगने लगे हैं
मुझे ये फासले
फासलें राही और मंजिल के
सपने और हकीकत के
फासले शफक और उफक के
फांसले उम्मीद और भरम के
फांसले ..
एक नदी के दो किनारों के
फासले हैं ...तो किनारे हैं
किनारें हैं ..तो बहाव है
बहाव है .. तो नदी है
नदी है ...तो तृप्ति है
और जीवन की इसी
तृप्ति को मैंने
जिया हैं इन फासलों में
जिनमे सांस लेता
एक पहला पहला प्यार
मेरी अहसासों की जीवितता को
हमेशा धड़कने बख्सता रहेगा ...
और हम अपनी अपनी
जगह लिए हुए
यूँ ही रहेगें
......
"मैं " .......... .... .....".तुम "
ये फांसलें !
- वंदना
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