Thursday, June 6, 2013

त्रिवेणी




छोटे से हैं पंख और आकाश नापते हो 
सुना है आकाश में सितारे बांटते हो ...

ख़्वाब और हकीकत का फर्क जानते हो ??? 




-- वंदना

6 comments:

  1. आपकी यह रचना कल शुक्रवार (08-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

    ReplyDelete
  2. आपकी यह रचना कल शनिवार (08-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

    ReplyDelete
  3. वह पक्षी है और तुम बच्ची ,अभी से ख़्वाब और हकीकत की बात करने लगीं !

    ReplyDelete
  4. वाह ...बहुत सुन्दर रचना ....फुर्सत के पल मेरे यहाँ भी पधारे

    ReplyDelete
  5. बहुत खूब ... निःशब्द करती त्रिवेणी ...

    ReplyDelete

तुम्हे जिस सच का दावा है  वो झूठा सच भी आधा है  तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती  जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं  कोरे मन पर महज़ लकीर...