
दिल में अपने र्द ए महताब रखते हैं
सच है कि चेहरे पे नकाब रखते हैं..
खुद ही तोडा था जिसे शाख से कभी
किताब में वही सूखा गुलाब रखते हैं
सीख लिया मिलने जुलने का अदब
मिलते है तो दूर कि आदाब रखते हैं
नादानियों पे हमको गुरूर बहुत है
हकीकते जिस्त से ओझल ख़्वाब रखते हैं
नजर से हमारी मदहोशी नहीं जाती
उन आँखों में जाने क्या शराब रखते हैं
हमसे मिलो कभी ...तो फासला रखना
नजरो में एहसास ए तलाब रखते हैं ..
महसूस करके तो देखो कर्ब यहाँ 'वंदु'
दिल में पीर का जैसे सैलाब रखते हैं
कलमकारों का ये हूनर गजब का है
खुद चिलमन में रहकर भी वो
दिल के हर जज्बात को बेनकाब रखते हैं..

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