Thursday, March 18, 2010

सांझ



एक ठिठुरती सांझ को


सागर के तट पर तपते देखा है ..


समंदर कि रूह को ..तपिश से..


पिघलते देखा है,


मंजर आसमां का


धुंआ धुंआ सा है ...


मैंने एक चिराग कि लो में


बादलो को जलते देखा है !!

9 comments:

  1. बहुत जबरदस्त!! उम्दा अभिव्यक्ति!

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  3. Waaaah Vandu....dat was amazing....

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  4. thanks everyone...thanks a lot for coming :)

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  5. nice poem....... good combination of word-hindi

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