Sunday, October 16, 2011

त्रिवेणी



किसी के   दर्द में शामिल ...बस दुआ तुम्हारी हो 
किसी की मुस्कुराहटो में मुस्कुराती खुशी तुम्हारी हो, 

न जमीं पे न आसमान में ,रिश्ते बनते हैं दिल के जहान में !!



वंदना 

11 comments:

  1. शुक्रिया ..:)

    ReplyDelete
  2. जरूरी कार्यो के कारण करीब 15 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

    ReplyDelete
  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच की जी रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर त्रिवेणी

    ReplyDelete

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...