Saturday, October 15, 2011

मुझ पर मेरा रंग



सपने , उम्मीद , आरजू ,
 दुआ , जिंदगी और 
तमाम सारे रंग समेटे
एक चाँद उगा है 
मेरी हथेली पर ....

अर्घ कि हैं जिसे मैंने 
अपनी हर ख्वाइश 


इसकी  गहराई लालिमा  में 
मुस्कुराती है मेरी श्रद्धा 
मेरा विश्वास, 

दुआ करती हूँ 
मेरा अपना ये रंग 
कभी फीका न हो ..

- वंदना 

11 comments:

  1. मैं भी दुआ करती हूँ ये रंग कभी फीका ना हो....शुभकामनाओ सहित...

    ReplyDelete
  2. वाह बहुत सुन्दर दुआ…………आपकी दुआ कबूल हो।

    ReplyDelete
  3. हम भी रंग गए आपके रंग में..

    ReplyDelete
  4. बहुत खूबसूरत दुआ और उतनी ही खूबसूरत ये तस्वीर है...

    ReplyDelete
  5. khoobsoorat ahsaas se bharee panktiyan

    ReplyDelete
  6. bahut bahut shukriyaa aap sabhi ka ....is sneh ke liye aabhaari hoon :)

    ReplyDelete
  7. करवाचौथ पर
    अपने चाँद को हथेली पे सजाया है
    मानो या ना मानो
    चाँद, आपको देख लजाया है
    खुशियों के रंग सारे
    भर दिए हैं चाँद में आपने
    छत
    अँगुलियों की बनाकर
    चाँद मुट्ठी में किया है आपने
    वन्दना जी !
    आपको हमारी शुभकामनाएं
    पूरी हों आपकी मनोकामनाएं .

    हाथ का फोटो इतना साफ़ है कि हाथ में विधि का लिखा साफ़ नज़र आ रहा है. मैंने पहले हाथ को पढ़ा फिर आपकी कविता को.......स्वस्थ्य शरीर और दृढ विचारों की मलिका हैं आप. ऊपरवाला मेहरबान है आप पर. बधाई हो.

    ReplyDelete
  8. शुक्रिया आप सभी का :) कोशलेन्द्र जी रचना के साथ साथ हाथ पढ़ने के लिए भी धन्यवाद !! :-)

    ReplyDelete

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...