Monday, October 17, 2011

त्रिवेणी





चाँद भीगी बिल्ली सा ,बादल सारे तितर बितर 
अंधकार  में डूबे गगन में  मची हो भगदड़ जैसे 

मौसम का मिजाज़ नही , ये हवा का रुतबा है !!


वंदना 

4 comments:

  1. rutba mausam ka ho ya hawaon ka,
    ham to bas khud ko sambhale firte hain,
    wo chand hai to aaj bhi sahta hai sabke sitam,
    ham to sarfaroshon ki jagah mukammil karte hain.

    Nice Triveni

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