Saturday, December 29, 2012

दामिनी


" दामिनी "

मुझे अपना कहने वालो
मेरे आदर्श देश के वासियों 
अगर तुम्हे जीना है बिना शर्मिंदगी 
लाचारी और बिना किसी खौफ के 
तो मेरे मरने को जिन्दा रक्खो 
अपने जहन में , आत्मा में , अपनी याद में 

मेरे उन सपनो के लिए नही जो 
मेरी आँखों में मेरे मरने से पहले मर गए 

मेरी उन चीखों के लिए नही जो 
अँधेरी नगरी के चोपट राजाओं तक नही पहुँच सकी 

मेरे माँ बाबा के उन अरमानों के लिए नही 
जो ना दफनाई हुई लाश कि तरह हमेशा उनके साथ रहेंगे 

मेरे उन ख्वाबों के लिए भी नही 
जो मरकर भी मुझमे जिन्दगी तलाशते रहे 

मेरे साथ तिल तिल कर मरती 
मेरे अपनों कि अंतरात्मा  के लिए भी नही 

मेरी मौत को जिन्दा रखना होगा तुम्हे
इंसानियत पर लगे कलक धोने के लिए 

हर रोज जाने कितनी रूहें  दफना दी जाती हैं 
जिन्दा लाश बनाकर ....उनकी आवाज़ बनने के लिए 

कल फिर किसी अँधेरी गली या नुक्कड़ पर 
फिर कोई चीख न गूंजने पाए उसके 
बचाव में हथियार बनाने के लिए ...


मुझे जिन्दा रक्खो खुद में 
अपने अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए ! 


- वंदना 

3 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 02/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (31-112-2012) के चर्चा मंच-1110 (साल की अन्तिम चर्चा) पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    --
    कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि चर्चा में स्थान पाने वाले ब्लॉगर्स को मैं सूचना क्यों भेजता हूँ कि उनकी प्रविष्टि की चर्चा चर्चा मंच पर है। लेकिन तभी अन्तर्मन से आवाज आती है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह सही कर रहा हूँ। क्योंकि इसका एक कारण तो यह है कि इससे लिंक सत्यापित हो जाते हैं और दूसरा कारण यह है कि पत्रिका या साइट पर यदि किसी का लिंक लिया जाता है उसको सूचित करना व्यवस्थापक का कर्तव्य होता है।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बलात्कार व हत्या रोकने के लिए समाज की सोच को बदलना बुनियादी शर्त है
    दामिनी जैसे घिनौने अपराधों में सिर्फ़ नेता और पुलिस को दोष देकर समाज को निरपराध नहीं माना जा सकता। बलात्कार और हत्या हमारे समाज का कल्चर है, अब से नहीं है बल्कि शुरू से ही है। तब न तो नेता होते थे और न ही पुलिस। तब क्या कारण थे ?
    इसी देश में औरत को विधवा हो जाने पर सती भी किया जाता था लेकिन अब नहीं किया जाता। इसका मतलब, जिस बात में समाज की सोच बदल गई, वह घिनौना अपराध भी बंद हो गया। बलात्कार और हत्या अभी तक जारी हैं तो इसका मतलब यह है कि इस संबंध में समाज की सोच नहीं बदली है।
    दुनिया के तमाम देशों पर नज़र डालकर देखना चाहिए कि किस देश में बलात्कार और हत्या के जुर्म सबसे कम होते हैं ?
    उस देश में कौन सी नैतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक और वैधानिक व्यवस्था काम करती है। उसके बारे में अपने देशवासियों को जागरूक करके हम अपने समाज की सोच बदल सकते हैं और उसे अपनाकर इन घिनौने अपराधों को रोका जा सकता है।

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