Friday, October 5, 2012

त्रिवेणी



जहाँ से अहल ए दिल लेकर अज़ाब लौट आये 
टकरा के कुर्बत से पलकों के खाब लौट आये.. 

फिर वहीँ ले आती हैं ये लम्हों कि कमजोरियाँ !

- वंदना 

6 comments:

  1. बहुत बढ़िया...

    अनु

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  2. वाह: वंदना जी बहुत खूब..

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (07-10-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  4. वाह उम्दा-उम्दा शे'र

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  5. उम्दा प्रस्तुति

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  6. वाह बहुत भाव पूर्ण अभिव्यक्ति ...

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तुम्हे जिस सच का दावा है  वो झूठा सच भी आधा है  तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती  जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं  कोरे मन पर महज़ लकीर...