Sunday, June 17, 2012

त्रिवेणी



हर लफ्ज़ इक दरिया और बात पानी पानी 
खामोशियों में एक दिन  पड़ेगी गुनगुनानी




गूंजेगी हर नफस  जब ये तर्क ए बेजुबानी !




' वंदना '
















5 comments:

  1. बहुत सुन्दर................

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  2. वाह: गागर में सागर...?

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (19-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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