Saturday, June 16, 2012

त्रिवेणी



तीरगी में घिरकर ही  ये जादूगरी देखी 
हर ठोकर के सजदे में ये आवारगी देखी 


जुगनुओ की रौशनी भी किसी काम आती है !


- वंदना 

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खुद को छोड़ आए कहाँ, कहाँ तलाश करते हैं,  रह रह के हम अपना ही पता याद करते हैं| खामोश सदाओं में घिरी है परछाई अपनी  भीड़ में  फैली...