Wednesday, June 6, 2012

त्रिवेणी




अपने ही नजरिये में कोई  धूल नजर सी आती है 


सही गलत कि गुफ्ती जब  समझ नही आती है 


जिन्दगी को यूँ हँसता देख सखी मन दुखता है ! 


- वंदना 

10 comments:

  1. उस हँसी में कोई वजूद नहीं होता

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी लगाई जा रही है!
    सूचनार्थ!

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  3. अति सुन्दर,,,

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  4. मन क्यूँ दुखता है.....??

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  5. ना मन को दुखाइये
    जिंदगी को संवारिये
    फिर खिलेगी हंसी ।

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