Friday, June 1, 2012

आशार



होती नहीं हर चीज़ वैसी दिखने में जो लगती है 

बहुत ज्यादा रौशनी भी आँखों को चुभ सकती है 





इस तरह भी ये जिन्दगी .अक्सर मिली हमसे 

मुर्ख बताकर द्रोपदी जैसे दुर्योधन पर हँसती है 



-वंदना


8 comments:

  1. इस तरह भी ये जिन्दगी .अक्सर मिली हमसे
    मुर्ख बताकर द्रोपदी जैसे दुर्योधन पर हँसती है
    ...वाह

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  2. सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  3. बहुत खूब वंदना जी

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  4. वाह...बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  5. बहूत जादा रोशनी भी आंखो को चुभती है...
    बहूत हि बेहतरीन बात कही है..
    लाजवाब:-)

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  6. सुंदर अभिव्यक्ति..

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  7. वाह ...बहुत खूब।

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  8. oho...kya analogy hai...2nd one is too good :)

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