Sunday, April 1, 2012

ग़ज़ल



मौसम से कोई  कै सा  इशारा कर गया 
 नसीम ए शहर को ही आवारा कर गया 

इन आँखों  से  गया  सपने तमाम कोई 
आज फिर मेरी नीदें बेसहारा कर गया  

अगले हर जन्म में ये चाँद हमारा होगा 
दुआ   हमारे वास्ते टूटता तारा कर गया 

कितने अजीब रंग में बांटी दुनिया को जिंदगी 
कौन खुदा कि इनायत का बंटवारा कर गया 

पानी में मिला दिया  किसने वजूद आंसू का 
सदा के लिए समंदर  कौन खारा कर गया 


- वंदना 

10 comments:

  1. दमदार प्रस्तुति ।

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  2. सुन्दर प्रस्तुति .....

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  3. अगले हर जन्म में ये चाँद हमारा होगा
    दुआ हमारे वास्ते टूटता तारा कर गया ... waah

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  5. पानी में मिला दिया किसने वजूद आंसू का
    सदा के लिए कौन समुन्दर खारा कर गया
    ....वाह बहुत ही उम्दा पंक्तियाँ !

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  6. बहुत सुन्दर लिखा हें !

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  7. बहुत बढ़िया.....................

    खूबसूरत रचना......

    अनु

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