Tuesday, September 7, 2010

दिल के दर्द को तुम परवाज मत देना



इन सिसकियों को कभी आवाज मत देना
दिल के दर्द को तुम परवाज मत देना

यहाँ अंदाज ए नजर न तुझे तेरी ही नजर में गाड़ दे
भूलकर भी किसी को दिल का राज मत देना

हर एक टूटते भ्रम का अंजाम बुरा होता है
कभी किसी को बेबुनियाद आगाज़ मत देना

यहाँ पत्थर में रखें आस्था तो नैय्या पार हो जाये
बेफिजूल किसी सर को खुदा का ताज मत देना

इंसानों में फरिस्ते यहाँ यूँ ही नहीं मिलते
कभी कमजोर हाथो में अरमाँ ए नाज़ मत देना

यूँ हर बात कि कोई वजह हो ये जरुरी तो नहीं
मगर बेवजह किसी मूक बात को अल्फाज़ मत देना

Vandana





19 comments:

  1. यूँ हर बात कि कोई वजह हो ये जरुरी तो नहीं
    मगर बेवजह किसी मूक बात को अल्फाज़ मत देना

    बहुत सुंदर!

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  2. यहाँ पत्थर में रखें आस्था तो नैय्या पार हो जाये
    बेफिजूल किसी सर को खुदा का ताज मत देना


    -बहुत उम्दा..वाह!

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  3. यहाँ अंदाज ए नजर न तुझे तेरी ही नजर में गाड़ दे
    भूलकर भी किसी को दिल का राज मत देना

    यूँ हर बात कि कोई वजह हो ये जरुरी तो नहीं
    मगर बेवजह किसी मूक बात को अल्फाज़ मत देना

    वाह वाह बहुत खूब वन्दना। बधाई।

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  4. भूलकर भी किसी को दिल का राज मत देना

    ये मिसरा तो आज की दुनिया की हकीकत बयां करता है.. बहुत खूब लिखा है. वाकई

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  5. जाने क्यों इस शयराने को पढ़ के यह बात दिल में बार बार आ रही है -

    जितने भी बड़े हो जाओ, हमेशा ख़याल रखना इस बात का...
    हर अलफ़ाज़ का अपना एक मोल होता है, और हर मोल की कीमत अदा करनी पड़ती है...

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  6. sabse pahli baat ye eyes bahut khoobsoorat hain

    पत्थर में रखें आस्था तो नैय्या पार हो जाये
    बेफिजूल किसी सर को खुदा का ताज मत देना

    Hindustaan mein ye aam baat hai..taaz dher saare aur sar kam

    इंसानों में फरिस्ते यहाँ यूँ ही नहीं मिलते
    कभी कमजोर हाथो में अरमाँ ए नाज़ मत देना

    Insaan farishta hi banna chahta hai...khud ko alag dikhane ke liye log kya kya nahi kar rahe

    यूँ हर बात कि कोई वजह हो ये जरुरी तो नहीं
    मगर बेवजह किसी मूक बात को अल्फाज़ मत देना

    Is baat ko to amal mein laya jaayega... hamko sudhaar ki zaroorat hai

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  7. यहाँ अंदाज ए नजर न तुझे तेरी ही नजर में गाड़ दे
    भूलकर भी किसी को दिल का राज मत देना

    ************
    यहाँ पत्थर में रखें आस्था तो नैय्या पार हो जाये
    बेफिजूल किसी सर को खुदा का ताज मत देना


    बहुत सुन्दर गज़ल ..बहुत खूब

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  8. यहाँ पत्थर में रखें आस्था तो नैय्या पार हो जाये
    बेफिजूल किसी सर को खुदा का ताज मत देना

    वाह एक एक लफ्ज़ बहुत ख़ूबसूरती से इस गज़ल की उम्दाय्गी बढ़ा रहा है. हमेशा की तरह ये भी एक सुंदर कृति.

    हर पल होंठों पे बसते हो, “अनामिका” पर, . देखिए

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  9. सारी पंक्तियाँ खूबसूरत और ये वाली तो बेहद ज़बरदस्त है

    हर एक टूटते भ्रम का अंजाम बुरा होता है
    कभी किसी को बेबुनियाद आगाज़ मत देना

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  10. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 14 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  11. दिल से निकले इन लफ्जों की अभिव्यक्ति का अंदाज निराला है...अच्छी रचना

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  12. har pankti waah ki haqdaar hai!

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  13. यहाँ पत्थर में रखें आस्था तो नैय्या पार हो जाये
    बेफिजूल किसी सर को खुदा का ताज मत देना

    Sunder rachna.

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  14. यूँ हर बात कि कोई वजह हो ये जरुरी तो नहीं
    मगर बेवजह किसी मूक बात को अल्फाज़ मत देना ..

    भूल कर भी किसी को दिल का राज मत देना ...

    अपनाने लायक सलाहें ..
    अच्छी ग़ज़ल !

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  15. यूँ हर बात कि कोई वजह हो ये जरुरी तो नहीं
    मगर बेवजह किसी मूक बात को अल्फाज़ मत देना

    i wonder how you manage to think so deep!!!!

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  16. इन सिसकियों को कभी आवाज मत देना... वैसे भी जब बात शब्‍दों से इतर हो जाए, तभी सिसकियां आती हैं। सिसकियों की बात जबान से कही भी नहीं जा सकती। सिसकियां तो खुद एक आवाज है, भावनाएं हैं, उन्‍हें अलग से कोई आवाज देने की क्‍या जरूरत। बहुत खुबसूरत- इन सिसकियों को कभी आवाज मत देना

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  17. अति सुंदर....

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  18. आप सचमुच बहुत अच्छा लिखती है --वंदना जी
    ------------------------प्रदीप छौक्कर (गुज्जर)

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  19. यहाँ पत्थर में रखें आस्था तो नैय्या पार हो जाये
    बेफिजूल किसी सर को खुदा का ताज मत देना


    बहुत सुन्दर गज़ल ..बहुत खूब

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