Friday, December 9, 2011

शाम

सिमटती शफक कि लालिमा ..


एक तरफ बिखरती हुई चांदनी....


एक तरफ उतरता हुआ सूरज 


एक तरफ चढ़ता हुआ चन्द्रम़ा ..


ये शाम बस यूँ ही ठहरी रहे मोला 


आज अंधियारे को तू बेपनाह कर दे!!






- वंदना 

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर छटा बिखेरी है ..उतरता हुआ सूरज चढ़ता हुआ चन्द्र्मा..

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  2. Aaj andhiyare ko tu bepanaha kar de

    Vandna ji , kamal ki khwaish k sath kamal ki rachna

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  3. बहुत ही अच्छी....

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  4. उत्कृष्ट रचना

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  5. बहुत बढ़िया रचना.

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