Saturday, December 3, 2011

त्रिवेणी





कभी आँचल ले उडी तो  कभी  चुभती हुई धूल 
कभी खुशबुएँ चुरा लाइ , कभी गयी संदेशे भूल 

इस पुरवाई को क्यूं ..अदब सिखाए नही जाते !!

- वंदना 

11 comments:

  1. पुरवा अदब सीख ले तो पुरवा नहीं रह जाएगी ...

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  2. बहुत सुन्दर ... जवाब रश्मि जी ने दे दिया है :)

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  3. बेहद खुबसूरत

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  4. वाह क्या खूब कहा है।

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  5. बेजोड़ भावाभियक्ति....

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  6. बेहतरीन पंक्तियां सुन्दर भाव..

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  7. वाह ... त्रिवेणी का जादू चल गया ...

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  8. wow....what a thought!!

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खुद को छोड़ आए कहाँ, कहाँ तलाश करते हैं,  रह रह के हम अपना ही पता याद करते हैं| खामोश सदाओं में घिरी है परछाई अपनी  भीड़ में  फैली...