Monday, September 12, 2011

ग़ज़ल




हमको जब भी  तुझपे  प्यार आया
बे अदब  बे वजह बे शुमार आया ..

महक उठे दिल के तयखाने तमाम
तसव्वुर का जब भी खुमार आया..

रुख बदलने लगी जिंदगी कि हवा
रातों कि चांदनी में निखार आया..

प्यास आँखों कि आंसू में ढली ऐसे
कैद दरिया में जैसे उतार आया ..

गूंजती है सदाओं से गली उसकी
मैं बेख्याली में  उसे   पुकार आया..
- वंदना 

7 comments:

  1. यह प्यार और यह जज्बात जब भी किसी पर उमड़ते हैं हम खुद को भूल जाते हैं .....आपका आभार

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  2. बेहद शानदार लाजवाब गज़ल । एक-एक शे’र लाजवाब।

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  3. बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल....

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  4. jab bhi pyaar aaya- beshumaar aaya
    behtareen gazal

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  5. लाजवाब शेर हैं सभी इस रूमानी गज़ल के ...

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  6. बेहद उम्दा मतला..... वाह... वाह...
    गज़ब के ख़याल हैं...
    सादर बधाई...

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  7. मतले से मकते तक खूबसूरत घज्ला, बहुत खूब!

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खुद को छोड़ आए कहाँ, कहाँ तलाश करते हैं,  रह रह के हम अपना ही पता याद करते हैं| खामोश सदाओं में घिरी है परछाई अपनी  भीड़ में  फैली...