Sunday, September 4, 2011

मौन होते हुए रिश्ते !



खतरनाक होती हैं 
पसरती हुई खामोसी 
खतरनाक होते हैं 
बातों के सिमटते दायरे 

खतरनाक हैं शब्दों कि 
बदलती हुई परिभाषाएं 
जज्बातों की 
खोती हुई गरिमा 

खतरनाक है 
टूटते हुए भरम 
भावनाओं के उधड़ते जाल 

खतरनाक होते हैं 
मौन होते हुए रिश्ते !


6 comments:

  1. चिंतन करने वाले भाव ..अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  2. सचमुच
    खतरनाक होते हैं
    मौन होते रिश्ते...

    सार्थक चिंतन... गंभीर रचना...
    सादर...

    ReplyDelete
  3. खतरनाक होते है मैन होते रिश्ते..गहन चिन्तन सार्थक रचना...

    ReplyDelete
  4. फिलहाल तो शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ और सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन जी को नमन!

    ReplyDelete
  5. सार्थक चिन्तन्।

    ReplyDelete
  6. sach kaha aapne khatarnak hote hai bahut.....maun hote hue rishte. yahi maun hi shuruaat hai rishto me zeher ki.

    ReplyDelete

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...