Thursday, August 25, 2011

त्रिवेणी




एक अकेली चिड़िया को देखा सामने बगीचे में 

  कितनी मगन ,  कभी  इधर फुदकती  कभी उधर 


बड़ा प्यारा होता है किसी तसव्वुर के साथ खेलना   !!

7 comments:

  1. वाह्……………गज़ब कर दिया।

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  2. खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  3. आप त्रिवेनियों का खुबसूरत संग्रह बना रही हैं...
    सादर बधाइयां...

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  4. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति....

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  5. वाह।
    बहुत शानदार रही यह त्रिवेणी।

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तुम्हे जिस सच का दावा है  वो झूठा सच भी आधा है  तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती  जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं  कोरे मन पर महज़ लकीर...