Wednesday, August 24, 2011

त्रिवेणी







तेरी  हर  इनायत पे एतबार है  मुझे 
 मेरी जिंदगी का सच स्वीकार है मुझे 

तू अपने एतबार पे एतबार तो रख ! 

7 comments:

  1. वाह: बहुत सुन्दर..कम शब्दों में अधिक भाव...

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  2. यह विधा तो बहुत बढ़िया रही!
    अच्छा शेर लिखा है आपने!

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  3. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  4. हाँ, दूसरे से पहले अपने पर ऐतबार जरूरी है..

    सुंदर

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  5. तू अपने ऐतबार पर ऐतबार तो रख... वाह सुन्दर....
    सादर बधाई...

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  6. सच है अपने एइत्बार पर ही ऐतबार नहीं होता ..
    लाजवाब ...

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  7. जितने कम शब्द उतनी ही गहराई है...

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