Monday, August 22, 2011

त्रिवेणी




आईने पर   ये इलज़ाम अच्छा  नहीं है
जब अपना नजरिया ही सच्चा नहीं है ..

सूरत और सीरत दो अलग अलग बाते हैं !

6 comments:

  1. बहुत खूब .. जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ !!

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  2. सचमुच! सूरत और सीरत दो अलग अलग बाते हैं...
    बहुत खुबसूरत खायाल
    सादर बधाई...

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  3. बिल्कुल सही बात कही………अति सुन्दर्।

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  4. बहुत सही...सुन्दर..

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खुद को छोड़ आए कहाँ, कहाँ तलाश करते हैं,  रह रह के हम अपना ही पता याद करते हैं| खामोश सदाओं में घिरी है परछाई अपनी  भीड़ में  फैली...