Tuesday, July 26, 2011

Kavi sammelan in Washington DC



वंदना सिंह

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गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...