Saturday, June 5, 2010


आज ले चल री निन्दियाँ

ये उड़न खटोला

चंदा के शहर में ...

मैं पलकों पे सजाने को

सितारे तोड़ लाऊँगी..

9 comments:

  1. waah bahut sundar bhav hai...


    mai palako pe sjane ko
    sitare tod laungi...

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  2. waaah...bahut sundar bhav hai,,,,


    mai palako pe sajane ko,
    sitare tod laungi..

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  3. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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  4. एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब

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  5. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  6. yaar tod lo... hamko bhi chahiye ...very good

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गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...