Thursday, May 6, 2010

गजल...



उसकी मासूमियत पर कभी हिमायत नहीं आती,
जहन में फिर भी मगर शिकायत नहीं आती..

उस मुजरिम को सीने में कैद करके रखते ,
मगर हिस्से में अपने ये इनायत नहीं आती ..

खुद से बिगड़ना तो कोई जरा हमसे सीखे ,
मगर अपनों से करनी हमें बगावत नहीं आती ..

एहसास बाँवरे...पलकों पे.. बसने चले आये ,
संजीदगी जज्बात कि..बनकर अदावत नहीं आती ..

सपनो में ,ख्वाइशो में..., है उलझी एक पहेली सी,
क्यूं जिन्दगी बनकर एक सच्ची आयत नहीं आती..

बुजुर्गो ने समझाई थी चार लफ्जों में जिन्दगी,
भूल गये हैं .अब वो पुरानी कहावत नहीं आती..

12 comments:

  1. बहुत खूब.. पहला शेर बढ़िया लगा..

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  2. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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  3. खुद से बिगड़ना तो कोई जरा हमसे सीखे ,
    मगर अपनों से करनी हमें बगावत नहीं आती ...wow! jawab nahi... hamare hi khayaal lagte hain

    सपनो में ,ख्वाइशो में..., है उलझी एक पहेली सी,
    क्यूं जिन्दगी बनकर एक सच्ची आयत नहीं आती...Simple kyonki zindgi hain........very good Vandana

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  4. @kush ji ....bahut bahut shuriya :)

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  5. sanjay ji ..bahut bahut shukriya aapnse samay diya apna :)

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  6. @ priya ...thanks a lott dear :)

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  7. बुजुर्गो ने समझाई थी चार लफ्जों में जिन्दगी,
    भूल गये हैं .अब वो पुरानी कहावत नहीं आती..

    vandana ji kya kbhub likha hai ... bahut accha likhti hai aap ... aage bhi or accha likha meri duwa hai aapke sath :)

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  8. खुद से बिगड़ना तो कोई जरा हमसे सीखे ,
    मगर अपनों से करनी हमें बगावत नहीं आती ..
    waak \kya baat hai...
    yun hi likhte rahein...
    -----------------------------------
    mere blog mein is baar...
    जाने क्यूँ उदास है मन....
    jaroora aayein
    regards
    http://i555.blogspot.com/

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  9. खुद से बिगड़ना तो कोई जरा हमसे सीखे ,
    मगर अपनों से करनी हमें बगावत नहीं आती ..

    ....simple n sweet!!!

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  10. hello vandana ji.
    लेती है यहाँ जिन्दगी हर रोज नया इम्तिहान
    बुजुर्गो कि दुआंओ का वो असर याद आता है ..

    फुर्सत के दिन ..जब यूँ अकेले में गुजरते हैं
    मुझे मेरी नानी का बहुत .वो घर याद आता है..

    really great...

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  11. बुजुर्गो ने समझाई थी चार लफ्जों में जिन्दगी,
    भूल गये हैं .अब वो पुरानी कहावत नहीं आती..

    saare sher khoobsurat hain par ye wala mera fav.. :D

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