Friday, April 30, 2010

गजल



वो झटक के मेरी नजर से ख़्वाब तोड़ गया,
पलकों पे मेरी ना सूखने वाला आब छोड़ गया ..

मेरी खुश्क आँखों को समंदर बख्सा जिसने,
लबो पे तरसती हुई एक प्यास छोड़ गया ..

लहरों कि रवानी में बहना सिखलाया मुझे ,
फिर हवाओं का जाने क्यूं रुख मोड़ गया..

देकर बेख्याली मुझको तमाम तन्हाई ले चला,
जागती नीदों में ..सोयी एक आश छोड़ गया..

मेरे सपनो के सितारे लाद चला एक जुगनूं
खामोश रातें और सूना आसमान छोड़ गया..

चाँद तारो कि कोई अपनी ख्वाइश कब थी,
बड़ी मासूम सी.. मेरी वो जिद तोड़ गया..

7 comments:

  1. vandana ji so beautiful.... aapki rachna padh kar bahut accha lagta hai ... khas kar aapki gazale ... inka rang or bhaw bahut sunder or bhasha bahut saral hai ... keep it up...

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  2. thanks a lott lucky ji ..aane or sarahne ke liye bahut bahut shukriya :)

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  3. चाँद तारो कि कोई अपनी ख्वाइश कब थी,
    बड़ी मासूम सी.. मेरी वो जिद तोड़ गया... bada masoom khyaal hain

    चाँद तारो कि कोई अपनी ख्वाइश कब थी,
    बड़ी मासूम सी.. मेरी वो जिद तोड़ गया.....aur ye bahut sachcha

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  4. पुरानी है मगर नयी लगती है ..
    चाँद तारों की कब अपनी कोई ख्वाहिश थी ,
    बड़ी मासूम सी मेरी जिद वो तोड़ गया | .........ये जिद कैसी जिद जो टूट गयी ...
    मेरे सपनो के सितारे लाद चला एक जुगनू
    खामोश रातें और सूना आसमान छोड़ गया |........इतने सारे तारे हैं आसमान में फिर भी एक चाँद के बिना सूना लगता है ....

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  5. पहला ही मिसरा जबरदस्त है..

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  6. oye..purani hai isliye khali khayalon ki baat karta hun ..bade achhe khayal hain khas kar doiosra sher bahut pasand aaya..

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  7. Wakai mein bahut hi dhansu khayaal hain aur pehla sher to bahut hi badhiya hai.

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