Monday, April 19, 2010

कुछ बस यूँ ही ...


क्यूं ख़्वाब ये सुनहरे जिन्दगी दिखलाती है ...
क्यूं दिल में झूठी कोई आश ये जगाती है
क्यूं इतनी छोटी हो जाती है दुनिया ,कि
दिल कि परवाज के दायरे में सिमटके रह जाती है ...
क्यूं किसी कि मुस्कुराहटें
जिन्दगी का सुकून बन जाती है ..
ये कैसे एहसास है के एक पल में
ज़माने भर कि ख़ुशी आँचल में समां जाती है..
और कभी ख़ुशी मन के आँगन से इस तरह जाती है
जैसे पेट भर के चिड़िया किसी छत से उड़ जाती है..

10 comments:

  1. क्यूं किसी कि मुस्कुराहटें
    जिन्दगी का सुकून बन जाती है ..
    kya baat hai...
    vanadana ji..bahut khub likha hai aapne....
    padhkar achha laga ..
    yun hi likhte rahein...
    regards...
    http://i555.blogspot.com/

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  2. ये कैसे एहसास है के एक पल में
    ज़माने भर कि ख़ुशी आँचल में समां जाती है....


    फिर इश्क ने तुझे याद किया
    इक आग गले लगाई
    इक प्याला ज़हर का
    मुहब्बत ने आगाज़ किया ....

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  3. और कभी ख़ुशी मन के आँगन से इस तरह जाती है
    जैसे पेट भर के चिड़िया किसी छत से उड़ जाती है..

    achha thoughyt hai vandna..nice...... :)

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  4. bahut suder Vandana! ye saare kyon ke jawaab ki talash hamko bhi hai...jo mile to batana :-) और कभी ख़ुशी मन के आँगन से इस तरह जाती है
    जैसे पेट भर के चिड़िया किसी छत से उड़ जाती है... Last line heart touching ...God bless you !

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  5. हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.

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  6. nice one, keep penning down :)

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  7. Nice one... :) Aur kushiyan jaakar jab wapis aati hain to khushion ka effect aur badh jaata hai. :)

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