Thursday, February 25, 2010


चाहतो का हम भी अगर अदब जान जाते
अपनी वफाओ का कुछ सबब जान जाते ..

ना रोते यूँ बेवजह.. ना बेकरार होते
दस्तूर ए मोहब्बत को गर हम जान जाते ..

निगाह रखते हम भी ..रवानी पे अपनी
रुख हवाओं का हम अगर पहचान जाते..

बेकसूरी में हमें ये सजा शायद ना मिलती
जुर्म करने कि हम अगर अदा जान जाते..

तुझसे जुस्तजू कोई हम हरगिज ना करते
तुझे ए शितमगर जो हम पहचान जाते..

5 comments:

  1. अपनी वफाओ का कुछ सबब जान जाते ..

    nice

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  2. तुझसे जुस्तजू कोई हम हरगिज ना करते
    तुझे ए शितमगर जो हम पहचान जाते..

    halanki saare sher bahut khoobsoorat hai.....lekin hamko ye zyada pasand aaya...bahut khoob!

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  3. बेकसूरी में हमें ये सजा शायद ना मिलती
    जुर्म करने कि हम अगर अदा जान जाते..

    awesum write...

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  4. रचना अच्छी है




    रंग लेकर के आई है तुम्हारे द्वार पर टोली
    उमंगें ले हवाओं में खड़ी है सामने होली

    निकलो बाहं फैलाये अंक में प्रीत को भर लो
    हारने दिल खड़े है हम जीत को आज तुम वर लो
    मधुर उल्लास की थिरकन में आके शामिल हो जाओ
    लिए शुभ कामना आयी है देखो द्वार पर होली

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