Sunday, June 28, 2009

एक सीख बड़ी मंहगी पड़ गयी .सपनो की बुनियाद बन हकीकत से लड़ गयी

इस कविता प्रेम ने हमें ख़ुद से बतियाना सिखा दिया
दिल के एहसासों को साज बनाना सिखा दिया

एक दर्द छुपाने की कोशिस ने मुस्कुराना सिखा दिया
अपनी कैद फिदरत ने पिंजर (खुद से )से दिल लगाना सिखा दिया

अपनों की रुसवाई ने गैरों से दिल लगाना सिखा दिया
किसी के एहसासों ने तन्हाई में महफिल सजाना सिखा दिया

प्रीत की इस रीत ने मुझे मीरा ,दिल को इकतारा बना दिया
मेरी आँखों को किताब ,और अश्को को अफसाना बना दिया


ऐ कलम तू सहेली है मेरी ..कुछ तो तेरे मेरे बीच ही रहा होता
तूने मेरी आँहों को गैरों के लबो का तराना बना दिया

2 comments:

  1. somewhat inconsistent,but overall its good..
    प्रीत की इस रीत ने मुझे मीरा ,दिल को इकतारा बना दिया
    मेरी आँखों को किताब ,और अश्को को अफसाना बना दिया
    real good stuff...

    "koshish" ki spelling me mistake hai...

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  2. hamara dil to tumhari is line ne jeet liya "ऐ कलम तू सहेली है मेरी ..कुछ तो तेरे मेरे बीच ही रहा होता
    तूने मेरी आँहों को गैरों के लबो का तराना बना दिया"

    Bilkul sachcha aur sunder!

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