Friday, May 29, 2009

कुछ मुक्तक पुराने पन्नो से

१)
मोहब्बत के गीत ,ये दिल के तराने क्यूं अच्छे लगते है
गर झूठे होते है ये फ़साने ,तो फ़िर क्यूं सच्चे लगते है
प्रीत की ये रीत गर लुभाती नही ज़माने को
तो बांवरी मीरा के गीत क्यूं अच्छे लगते है
किसी की मासूम आँखों के खुआब गर गुनाह कहलाते है
तो क्यूं पूजते है लोग राधा को ,क्यूं मोहन के रास अच्छे लगते है|


२)
मैं
काठ का पिंजर हूँ
तू पंछी एक फडफडाता
जी करता है मेरा मैं टूटकर बिखर जाऊं
ऐ दिल ,तेरा यूँ तडफना अब देखा नही जाता |

३)
खुदगर्ज है ये दुनिया बहुत
हर किसी के आगे यूँ आंसू बहाया न करो
लोग मुट्ठी में नमक लिए फिरते है
हर किसी को जखम दिखाया न करो |

४)
ख़ुद की गुमराहियों से डर लगता है
इसलिए आईना साथ रखती हूँ
आएने में मैं कभी झुर्रिया नही गिनती
मुस्कुराहट गिनती हूँ |

५) उजाले न जाने क्यूं अच्छे नही लगते
साये न जाने क्यूं सच्चे नही लगते
दुनिया की नजरो के कथन समझने लगी हूँ जबसे
साधू भी न जाने क्यूं सच्चे नही लगते |



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6 comments:

  1. wah wah! kamaal hain.......choti lines aur gahri baat "खुदगर्ज है ये दुनिया बहुत
    हर किसी के आगे यूँ आंसू बहाया न करो
    लोग मुट्ठी में नमक लिए फिरते है
    हर किसी को जखम दिखाया न करो |"

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  2. मोहब्बत के गीत ,ये दिल के तराने क्यूं अच्छे लगते है
    गर झूठे होते है ये फ़साने ,तो फ़िर क्यूं सच्चे लगते है
    प्रीत की ये रीत गर लुभाती नही ज़माने को
    तो बांवरी मीरा के गीत क्यूं अच्छे लगते है
    किसी की मासूम आँखों के खुआब गर गुनाह कहलाते है
    तो क्यूं पूजते है लोग राधा को ,क्यूं मोहन के रास अच्छे लगते है|


    Waaah ji waaahhh....sach kaha aapne.
    Sabhi muktak bahut bahut khoobsurat hain.

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  3. मोहब्बत के गीत ,ये दिल के तराने क्यूं अच्छे लगते है
    गर झूठे होते है ये फ़साने ,तो फ़िर क्यूं सच्चे लगते है
    प्रीत की ये रीत गर लुभाती नही ज़माने को
    तो बांवरी मीरा के गीत क्यूं अच्छे लगते है
    किसी की मासूम आँखों के खुआब गर गुनाह कहलाते है
    तो क्यूं पूजते है लोग राधा को ,क्यूं मोहन के रास अच्छे लगते है|


    sabhi kshanikayen/muktak, behatareen, bahut bahut badhai.

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  4. किसी की मासूम आँखों के खुआब गर गुनाह कहलाते है
    तो क्यूं पूजते है लोग राधा को ,क्यूं मोहन के रास अच्छे लगते है|

    bahut bhavpurn pantiyan hai.
    Pasand aayi aapke ye muktak.
    Navnit Nirav

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  5. bahut khoobsoorat rachnaaye hain. aise hee likhtee raho vandana

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  6. kisko achha,kisko bahut achha aur kisko bahut bahut achha kahoon...great going sachmuch...soch to itni deep,itni achhee thi... :)

    www.pyasasajal.blogspot.com

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