Thursday, June 4, 2009

मैं कम कहूँगी.. तुम ज्यादा समझना

१)
शमां से शमां ..जलती आई है ....
वास्ते वास्तो से निकलते है
अकल आयी है ठोकरे खाती
रास्ते रास्तो से निकलते है


२)
परिंदों से सीखा है सबक मैंने उडानों का
रास्ता चुन लिया है अबतो आसमानों का
मंजिल दूर है कितनी इसकी परवाह नही मुझको
जब सफर ही इतना सुहाना है मेरे अरमानो का



३)इस एक दिल के अफ़साने हजार बन जाते है
मैखाना एक होता है ,पैमाने हजार बन जाते है
इश्क करने के लिए चलता नही बहाना कोई
बेवफाई के बहाने हजार बन जाते है



५)खुशी और गम ..आनी जानी है
ये दुनिया राम कहानी है
यही आलम है जिन्दगी का बस
यादे बाकी रह जानी है ....


६)
खुआबो
के झरोखे से कोई आवाज देता है
जिन्दगी में अजनबी से आगाज देता है
कोई तो है.. जो अनजाना है मगर
आईने में ख़ुद से मचलने के मुझे अंदाज देता है


७)
हमारी बेख्याली पर अब इल्जाम लगने लगे है
लोग हमसे अनकहे से सवाल करने लगे है
कोई परख न ले इन आंखों के मंजर
हम पलके उठाने से भी डरने लगे है

4 comments:

  1. Saaton ki saaton nano nazmein bahut hi khoobsurat hain.

    हमारी बेख्याली पर अब इल्जाम लगने लगे है
    लोग हमसे अनकहे से सवाल करने लगे है
    कोई परख न ले इन आंखों के मंजर
    हम पलके उठाने से भी डरने लगे है

    Waah.....bahut khoob kaha aapne.

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  2. achha likhti ho bahut...to be more precise,achha sochti ho bahut...I think u are one of the youngest hindi bloggers,and its been a great going...keep it up

    I have a couple of things to say,not even suggestions,take them as friendly comments..hope you wont mind them :)

    try out some atukant poetry,as an experiment,maybe a couple of times...it will give u more creative freedom..ur thoughts are brilliant,flow is usually equally good,just sometimes a few lines seem a little forced...ex: जिन्दगी में अजनबी से आगाज देता है honestly these expressions dont realy match to the class or ur usual compositions....take it in a positive sense,I know this comment is a little harsh on ur sincere attempts,but it is because u can be so much more awesome....

    keep writing :)

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  3. acchhi pantiyan hain.Bhav bahi spast hai jo meri samajh mein aa rahe hain. shyad isi karan main comment bhi de raha hoon.

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  4. muktak mein to tumhara jawab nahi......
    कोई परख न ले इन आंखों के मंजर
    हम पलके उठाने से भी डरने लगे है

    bahoot khoob

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