Sunday, May 27, 2012

त्रिवेणी


मूँह के सामने कुछ और है पीठ पीछे कुछ और 

अपनी समझ से रहें दुखी, है मन में पाले चोर 


भगवान् मदद सबकी करवाना .पर ऐसे लोगो से बचाना !

- वंदना


3 comments:

  1. चंद पंक्तियाँ .... बहुत कुछ कह दिया

    ReplyDelete
  2. सही बात पीठ पीछे बोलनेवालो
    से भगवान बचाए ..

    ReplyDelete
  3. बहुत ही बढ़िया ।

    सादर

    ReplyDelete

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...