Monday, March 12, 2012

Kavi sammelan in Washington DC

- वंदना सिंह 

No comments:

Post a Comment

खुद को छोड़ आए कहाँ, कहाँ तलाश करते हैं,  रह रह के हम अपना ही पता याद करते हैं| खामोश सदाओं में घिरी है परछाई अपनी  भीड़ में  फैली...