Sunday, January 15, 2012

त्रिवेणी


पहेली है जिंदगी मगर आसान होनी चाहिए
सीरत कि भी आईने से पहचान होनी चाहिए

कैसे भा गया आखिर यूँ  भीड़ में खो जाना ?


--- वंदना

9 comments:

  1. सीरत की भी आईने से पहचान होनी चाहिए!
    वाह!

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  2. अपनी सुविधा से लिए, चर्चा के दो वार।
    चर्चा मंच सजाउँगा, मंगल और बुधवार।।
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. सजा संवरा सुन्दर ब्लाग देखकर मन खुश हो गया . बधाई हो

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  4. सुन्दर पंक्तियाँ ...

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  5. भावों से नाजुक शब्‍द.

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