Monday, October 31, 2011

छणिका ...



इतना सा ही है सच 
दुनिया में  एक तरफ़ा 
प्रेम के अस्तित्व का ,,
जहाँ बुनियाद बेसबब हो 
तो  भावनाएं भी 
अछूत हो जाती है ...


वंदना 



4 comments:

  1. गहन बात क्षणिका में ..

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन

    कल 02/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है।

    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    छठपूजा की शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...