Sunday, January 31, 2010

ek chhoti si gajal



पलकों के साए में एक नमी सी है ..
जिन्दगी चलती सड़क पर थमी सी है

सुर सरगम ताल सब मेरा मुझसे है
फिर भी गीतों में मेरे एक कमी सी है

मैंने अश्को से निखारे है अपने ख़्वाब सारे
फिर भी एक धुल इन पर जमी सी है

दिल से हो गया है शायद गुनाह कोई
तभी ये धड़कने मेरी इतना सहमी सी है

कभी मचल उठती है कभी तड़प उठती है
खुद अपनी रवानी में बहती ये हवाएं ..हमी सी है....

10 comments:

  1. "पलकों के साए में एक नमी सी है ..
    जिन्दगी चलती सड़क पर थमी सी है
    ....
    दिल से हो गया है शायद गुनाह कोई
    तभी ये धड़कने मेरी इतना सहमी सी है"

    सार्थक भाव सम्प्रेषण और सुंदर रचना.

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  2. Beautiful.....

    मैंने अश्को से निखारे है अपने ख़्वाब सारे
    फिर भी एक धुल इन पर जमी सी है

    bhagwan kare tumhari zindagi ki kami jaldi poori ho aur dhool hate.... :)
    Waise itni jaldi peecha kaise chooth sakta hai....hehehehhe

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  3. beautiful creation .... heart touching... keep it up..

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  4. wow.... to ultimately gazal ban gai....zyada tareef kari...to itraogi...lekin bina karein raha bhi nahi ja sakta....asusual chori ho rahi hai :-)

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  5. मैंने अश्को से निखारे है अपने ख़्वाब सारे
    फिर भी एक धुल इन पर जमी सी है

    बहुत उम्दा शेर ......... लाजवाब लिखा है ...

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  6. thans a lot to all of u .....
    bahut bahut shukriya apna keemti tim dene k liye ....:)

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  7. wah ..........
    सुर सरगम ताल सब मेरा मुझसे है
    फिर भी गीतों में मेरे एक कमी सी है
    thanks

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  8. हाजरी मदीने कि चोखट पर हर रोज जरूरी नहीं
    रोते बच्चे और ..पीड़ित बुजुर्गो के साथ कुछ पल रह लिया करो..
    .badhia abhivyakti.

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  9. hi....gr8 u r simly supeb!!!!!!!!!
    Tu na aayegi maloom hai mujhko
    fir bhi har chitti mein tera pata likhkar bheju..
    mere syahi mein nahi badti jati ,kaise kagaj mein khud ko sametkar bheju,
    padh lene wo chitti kinhi ankhon se jo chitti mein tujhe marka bheju!!!

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