Saturday, January 7, 2012

त्रिवेणी



वक्त के पाँव में बेडियाँ  हमसे  डाली नहीं गयीं
अनमोल थी इनायते मगर  संभाली  नहीं  गयीं

जिंदगी सिखाती कम है इम्तिहान ज्यादा लेती है !


- वंदना 

4 comments:

  1. जिसे हम ही पास करते हैं..

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  2. बहुत सही कहा...

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  3. बेहद खूबस्रूरत ! पूरई गज़ल का इंतज़ार है !

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  4. वाह बेहतरीन त्रिवेणी..

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खुद को छोड़ आए कहाँ, कहाँ तलाश करते हैं,  रह रह के हम अपना ही पता याद करते हैं| खामोश सदाओं में घिरी है परछाई अपनी  भीड़ में  फैली...