Thursday, May 14, 2009

इस बेगाने देश में

इस बेगाने देश में हर चीज परायी लगती है
मिलते है लोग अपने से मगर मुलाक़ात परायी लगती है
यहाँ सूरज की लालीमा वैसी ही है मगर भौर परायी लगती है
चाँद तो अपना सा है मगर रात परायी लगती है
यहाँ के सपने तो मेरे अपने है मगर पहचान पराई लगती है
तन्हाई तो मेरी अपनी है मगर हर महफिल परायी लगती है
बहुत कुछ खो दिया है (अपने बुजुर्ग अपना देश )कुछ पाने की तमन्ना में
ये पीड तो मेरी अपनी है ..मगर प्रीत परायी लगती है

3 comments:

  1. YE JEEVAN BESHAK APNAA HAI,
    PAR REET PARAAIE LAGTI HAI.
    JAANE KAISAA JEEVAN JISKI ,
    HAR BAAT PARAAIE LAGTI HAI.
    HAM MERA MERA KARTE HAIN ,
    HAR CHEEZ PARAAIE LAGTI HAI.

    SAHI LIKHAA HAI ! ZINDAGI MAIN AKSAR LAGTAA HAI KI YAHAAN APNAA TO BAHUT KAM HAI
    MAN KE AHSAASON KO SHABD DENE KE LIYE BADHAAIE

    ReplyDelete
  2. To phir aa jao wapas... yaha bhi to sabhi apne hain.
    Achchi lagi humko... man se likha hain

    ReplyDelete
  3. Bichadhne ka dard liye hue nazm dil bhigo gayi.

    ReplyDelete

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...