गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...

-
बंद दरिचो से गुजरकर वो हवा नहीं आती उन गलियों से अब कोई सदा नहीं आती .. बादलो से अपनी बहुत बनती है, शायद इसी जलन...
-
1 ( मन का कहन ) मोंजों का मैं राही हूँ ,झोंके है पग मेरा मैं किसी डाल ठहरा नहीं , हर एक पात पे मेरा डेरा 2 ऐ आसमां मुझे देखकर तू मुस्कुरा...
-
वफायें ..जफ़ाएं तय होती है इश्क में सजाएं तय होती हैं पाना खोना हैं जीवन के पहलू खुदा की रजाएं.. तय होती हैं ये माना... के गुन...
शुभकामनायें ||
ReplyDeleteयह रंगों का ही खेल है ॥ सुंदर अभिव्यक्ति
ReplyDeleterango ka khel...sundar bhaav...
ReplyDeleteगहरी अभिव्यक्ति गहरी सोच
ReplyDeleteक्या खूभ चितेरा है ऊपर वाला और क्या खूब रंग भरे हैं उसमें जिंदगी ने!
ReplyDeleteआपकी भी कामना कुछ वैसी सी! सुंदर अभिवयक्ति!
इन रंगों से ही तो नए रंग भी बनते हैं नए ख़्वाबों की तरह ...
ReplyDeleteबहुत खूब लिखा है ...
सही कहा आपने
ReplyDeleteवाह ...बहुत खूब।
ReplyDelete