गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
सबकी एक सी गति
sundar
बेहतरीन भाव ...
गंभीर घाव करती पंक्तियाँ
बहुत खूब ... लाजवाब ...
बहुत श्रेष्ठ और सटीक!
baat gahri to hai ...
सही कहा आपने ..जिंदगी हर पल रंग बदलती है ..जिंदगी की खुशियाँ दामन में नहीं सिमटती ऐ मौत ! आ मुझे गले लगा ले ...
जितना भी सुल्झाते हैं इसेऔर उलझती है ज़िन्दगी !बहुत सुंदर वंदना जी
तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...
सबकी एक सी गति
ReplyDeletesundar
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ReplyDeleteगंभीर घाव करती पंक्तियाँ
ReplyDeleteबहुत खूब ... लाजवाब ...
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ReplyDeletebaat gahri to hai ...
Deleteसही कहा आपने ..जिंदगी हर पल रंग बदलती है ..
ReplyDeleteजिंदगी की खुशियाँ
दामन में नहीं सिमटती
ऐ मौत ! आ
मुझे गले लगा ले ...
जितना भी सुल्झाते हैं इसे
ReplyDeleteऔर उलझती है ज़िन्दगी !
बहुत सुंदर वंदना जी