जब वक्त कि धुंध में
यादे कहीं खोने लगें ..
जब्त कि थपकियों से
ख्वाइशे सब सोने लगें ..
बदल ने लगें मायने
अगर मेरी तहरीरों के ..
हर खलिश दिल कि
मौन अगर होने लगे..
जब ख्यालों का नगर
ख़ाली ख़ाली सा हो..
जब अहसासों कि
दुनिया भी रितने लगे ..
जीवन के किसी मौड़ पर
मैं खुद को कहीं भूल जाऊं
बस ऐसे कुछ कमजोर
पलों में ....तुम मुझको
आवाज लगाते रहना..
मैं चाहूँ या ना चाहूं
ऐ खुमार ए तसव्वुर
तुम यूँ ही आते रहना.. !
' वंदना '




