गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
khoob kahi..
बहुत सुंदर!!!!अनु
बहुत खूब... सादर
बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दरअभिव्यक्ति.........
वाह ...बेहतरीन ।
behtreen...
तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...
khoob kahi..
ReplyDeleteबहुत सुंदर!!!!
ReplyDeleteअनु
बहुत खूब...
ReplyDeleteसादर
बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
ReplyDeleteअभिव्यक्ति.........
वाह ...बेहतरीन ।
ReplyDeletebehtreen...
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