गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
bhaut hi sundar panktiya...
Ati Sundar
आपकी कवितायें वैगरह मैं अक्सर फीड से पढता हूँ..सबसे अच्छी बात मुझे जो लगती है वो ये की कवितायें तो खूबसूरत होती ही हैं, आप तस्वीरें भी चुन के लगाती हैं,खूबसूरती और बढ़ जाती है कवितायों की!!
bahut bahut shukriyaa aap sabhi ka ,....aabhaari hoon .:)
तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...
bhaut hi sundar panktiya...
ReplyDeleteAti Sundar
ReplyDeleteआपकी कवितायें वैगरह मैं अक्सर फीड से पढता हूँ..सबसे अच्छी बात मुझे जो लगती है वो ये की कवितायें तो खूबसूरत होती ही हैं, आप तस्वीरें भी चुन के लगाती हैं,
ReplyDeleteखूबसूरती और बढ़ जाती है कवितायों की!!
bahut bahut shukriyaa aap sabhi ka ,....aabhaari hoon .:)
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