गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
बहुत खूब .. जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ !!
सचमुच! सूरत और सीरत दो अलग अलग बाते हैं...बहुत खुबसूरत खायाल सादर बधाई...
waah...
बहुत सही!
बिल्कुल सही बात कही………अति सुन्दर्।
बहुत सही...सुन्दर..
तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...
बहुत खूब .. जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ !!
ReplyDeleteसचमुच! सूरत और सीरत दो अलग अलग बाते हैं...
ReplyDeleteबहुत खुबसूरत खायाल
सादर बधाई...
waah...
ReplyDeleteबहुत सही!
ReplyDeleteबिल्कुल सही बात कही………अति सुन्दर्।
ReplyDeleteबहुत सही...सुन्दर..
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