गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
बहुत खूब ..
waah...
वाह! बहुत खूब....
आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें बहुत ही सुन्दर
बहुत खूब....सादर...
बहुत ही अच्छा लिखा है बहुत ही सच लिखा है..निकाह जो करलो तुम अपनी मज़बूरी,अपने हालातों सेकोई गम नही उम्र भर ये रस्मे जो निभानी पड़ जायेंजब तुमको खुशी मिल जाए,फिर इनको तलाक़ दे देना तुम । अक्षय-मन
तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...
बहुत खूब ..
ReplyDeletewaah...
ReplyDeleteवाह! बहुत खूब....
ReplyDeleteआपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर
बहुत खूब....
ReplyDeleteसादर...
बहुत ही अच्छा लिखा है बहुत ही सच लिखा है..
ReplyDeleteनिकाह जो करलो तुम अपनी मज़बूरी,अपने हालातों से
कोई गम नही उम्र भर ये रस्मे जो निभानी पड़ जायें
जब तुमको खुशी मिल जाए,फिर इनको तलाक़ दे देना तुम । अक्षय-मन