गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
बहुत खूब ... कांश को काश कर लें ..
बहुत सच कहा है...
सीधी खरी बात
बहुत सुंदर ...आपका आभार इस सार्थक प्रस्तुति के लिए
wahhh!!!! bohot khoob
यही टीस है जो मन को मथ जाती है ! ना तो हमने ही कहा कुछ ना तो तुमने ही सुना हज़ारों फ़साने ज़माने में फिर भी ना जाने कहाँ से बयां हो गये !बहुत सुन्दर प्रस्तुति ! बधाई एवं शुभकामनायें !
बहुत खूब.सलाम.
bahut khoob..har tees laajmi hoti hai, BASHARTE wo dil ki gahraai me gote kha kha kar doob jaye...
chhoti lekin khoobsoorat rachna.
तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...
बहुत खूब ...
ReplyDeleteकांश को काश कर लें ..
बहुत सच कहा है...
ReplyDeleteसीधी खरी बात
ReplyDeleteबहुत सुंदर ...आपका आभार इस सार्थक प्रस्तुति के लिए
ReplyDeletewahhh!!!! bohot khoob
ReplyDeleteयही टीस है जो मन को मथ जाती है !
ReplyDeleteना तो हमने ही कहा कुछ ना तो तुमने ही सुना
हज़ारों फ़साने ज़माने में फिर भी
ना जाने कहाँ से बयां हो गये !
बहुत सुन्दर प्रस्तुति ! बधाई एवं शुभकामनायें !
बहुत खूब.
ReplyDeleteसलाम.
bahut khoob..
ReplyDeletehar tees laajmi hoti hai, BASHARTE wo dil ki gahraai me gote kha kha kar doob jaye...
chhoti lekin khoobsoorat rachna.
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