पहले पहल ही दिल दुखता है जब चीज़ कोई खो जाती है
फिर हमको खोते रहने की, इक आदत सी हो जाती है
पानी में फेंका न करो अपनी किसी इबादत को
पहले सिक्के खोते हैं, और, फिर दुआ खो जाती है
कितनी देर ठहर सकेगी पलकों पर ये पीर पुरानी
आँखों को मलते ही दिल में ,टीस नयी उग आती है
अपनी समझ पतवार ए जिंदगी, हम गुमाँ में रहते हैं
है जाना हमको वहीं जहाँ, ये लहर हमें ले जाती है
कौन सुने साँसों की सरगम, दिल की ताल पहचाने कौन
कदम ताल का नाम जिंदगी , सो ये चलती जाती है
~ वंदना
~ वंदना


