हाँ मैंने तुम्हे पीछे से आवाज़ दी थी
ये जानते हुए भी की तुम नही रुकोगे
मुझे सिर्फ तुम्हारा लौटना आसान करना था !
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अगर जिंदगी फिर कभी ऐसे दोराहे पर लाये
जहाँ तुम्हे कोई लाख चाहकर न पुकार पाये
तो समझना तुम अपने ही सन्नाटें में खो चुके हो !
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जब रात चांदनी की आगोश में दम तोड़ चुकी होगी
जब चाँद को गहराते हुए सन्नाटें फाँक चुके होगे
तुम अपनी खिड़की पर मुझे जागता पाओगे !
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जब हर टूटन तुम्हारे बदन से रिस चुकी हो
जब पीर का पखेरू कफ़स तोड़ कर जा चुका हो
खुद को एक बार फिर जिन्दा घोषित कर देना !
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दिलों के कच्चे यकीन की छत टपक रही थी
पलकों के शामियाने में इंतज़ार भीग रहा था
इश्क का वजूद गल कर गारा हो गया
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लड़की के पास चंद सीपियाँ थी साहिल के रेत से चुनी हुईं
लड़के को उनमे एक भी मोती नही मिला तो लौट गया
लड़की ने अपनी चाहना सीपियों के साथ रेत में दफना दी!
~ वंदना




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