मौन के विस्तार में
सिमटी रफाकत कि तहरीरे
सच्ची तस्वीरों के
झूठे भेद
जज्बातों की
कच्ची बुनियाद में धँसे हुए
सपनो के शीशमहल
दिल की बेजुबानियों में
कैद ये सरगम
आँखों की कोर से
नाउम्मीद ताकते अहसास
मुझमे पल पल
जीती मरती
यादों के बवंडर
इश्क की परिभाषा मांगते हैं
और मैं हँस देती हूँ
सिर्फ यही सोचकर
इश्क मुझे मुकम्मल चाहिए था
-वंदना





