चलो जिंदगी को आसान कर लेते हैं
खुद पर आज इक एहसान कर लेते हैं
एहसासों को जुबाँ फिर मिले न मिले
एक बार ख़ामोशी को अज़ान कर लेते हैं
मोहब्बत के सजदे तो महंगे बहुत हैं
समझोतों को जीने का सामान कर लेते हैं
इस पिंजर में एक परिंदा सर पटकता है
दिल की जमीं पे एक आसमान कर लेते हैं
देकर रिहाई इस दिल ए गुनहगार को
इसी सजा को अपना ईमान कर लेते हैं
याद नही है तहरीर ए वजूद भी अब तो
सोचते थे इश्क को पहचान कर लेते हैं
- वंदना

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